Skip to main content

Featured

भारतीय लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता राजेश तलवार को नॉटिंघम विश्वविद्यालय के अलुमनाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया

  नई दिल्ली:  सुप्रसिद्ध भारतीय लेखक और मानवाधिकार अधिवक्ता  राजेश तलवार  को हाल ही में  यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम  की ओर से  Alumni Laureate Award  से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार विश्वविद्यालय के उन पूर्व छात्रों को दिया जाता है जिन्होंने अपने पेशे, समाज और सामाजिक सरोकारों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। राजेश तलवार ने वर्ष 1996-97 में ब्रिटिश चेवेनिंग स्कॉलर के रूप में  नॉटिंघम विश्वविद्यालय  से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून में एलएलएम की पढ़ाई की थी। बीते दो दशकों में उन्होंने  संयुक्त राष्ट्र  के साथ  कोसोवो, सोमालिया, अफगानिस्तान, केन्या, ईस्ट तिमोर और लाइबेरिया  जैसे देशों में प्रमुख पदों पर कार्य किया है। कोसोवो मिशन में वह  मानवाधिकार सलाहकार पैनल के सचिवालय के अध्यक्ष  भी रहे। कानून की पृष्ठभूमि से आने वाले तलवार ने अब तक  42 पुस्तकें  लिखी हैं, जिनमें मानवाधिकार, सामाजिक मुद्दे, बच्चों की कहानियाँ और नाटक शामिल हैं। उनकी चर्चित किताबों में  The Third Sex and Human Rights ,  C...

EPF Rate Hike: ईपीएफओ के 7 करोड़ खाताधारकों को इस हफ्ते मिलेगी बड़ी सौगात, ब्याज दरों का होगा एलान


नई दिल्ली: इस हफ्ते ईपीएफओ (Employee Provident Fund Organization) के खाताधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है। लगभग 7 करोड़ खाताधारकों के लिए 2024-25 के लिए प्रॉविडेंट फंड पर ब्याज दर का एलान इस हफ्ते किया जा सकता है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक, जो मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में होगी, 28 फरवरी 2025 यानी इस शुक्रवार को हो सकती है। इस बैठक में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए ईपीएफ पर ब्याज दर का निर्णय लिया जाएगा। पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ब्याज दर 8.25% रही थी। यदि बाजार के अच्छे प्रदर्शन के चलते ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो इस वर्ष भी इसी दर को जारी रखा जा सकता है।

ईपीएफ पर ब्याज दर का इतिहास

  • 2023-24 में 8.25%
  • 2022-23 में 8.15%
  • 2021-22 में 8.10%

इसके अलावा, इस बैठक में Interest Stabilisation Reserve Fund बनाने की भी चर्चा हो सकती है। इसका उद्देश्य ईपीएफओ खाताधारकों को स्थिर रिटर्न देना है, चाहे बाजार में उतार-चढ़ाव हो या ईपीएफओ को अपने निवेश पर कम रिटर्न मिले। अगर सेंट्रल बोर्ड इसे मंजूरी दे देता है, तो यह योजना 2026-27 से लागू हो सकती है।

ईपीएफओ, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी सोशल सिक्योरिटी स्कीम मानी जाती है। इसमें कर्मचारियों का हर महीने एक निश्चित हिस्सा प्रॉविडेंट फंड में जाता है और नियोक्ता भी इसका योगदान करता है। कर्मचारी इस पैसे को नौकरी छोड़ने, घर खरीदने, शादी, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट के बाद निकाल सकते हैं।

यह बदलाव कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपने भविष्य के लिए इन फंड्स पर निर्भर रहते हैं।

Comments